छठ महापर्व विशेष | संध्या अर्घ्य एवं प्रातः अर्घ्य संग्रह● LIVE

छठ गीत

"कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए..." — छठी मईया के पावन गीतों से गूंजता हर घाट

कांच ही बांस के बहंगिया
#1
आज का सर्वोपरि गीत (Featured Track)

कांच ही बांस के बहंगिया

स्वर: स्वरकोकिला शारदा सिन्हा • पारंपरिक छठ गीत

14.2M श्रोता
लाखों भक्तों द्वारा प्रज्वलित दीप: 148,290

छठ महापर्व 2026 की पावन तिथियां

चार दिवसीय अनुष्ठान एवं अर्घ्य समय सारणी

13 - 16 नवंबर 2026
पहला दिन (Day 1)

नहाय-खाय (Nahay Khay)

13 नवंबर 2026 (शुक्रवार)

पवित्र नदी स्नान, सात्विक कद्दू भात एवं चने की दाल का प्रसाद ग्रहण।

दूसरा दिन (Day 2)

खरना (Kharna)

14 नवंबर 2026 (शनिवार)

दिनभर का निर्जला उपवास, संध्या समय गुड़-खीर (रसिया) एवं रोटी का पावन प्रसाद।

तीसरा दिन (Day 3)

संध्या अर्घ्य (Sandhya Arghya)

15 नवंबर 2026 (रविवार)

अस्ताचलगामी भगवान सूर्य देव को डूबते समय ठेकुआ एवं फलों से प्रथम अर्घ्य अर्पण।

चौथा दिन (Day 4)

प्रातः / उषा अर्घ्य (Usha Arghya)

16 नवंबर 2026 (सोमवार)

उदीयमान सूर्य देव को दूसरा अर्घ्य अर्पण एवं पारण के साथ व्रत का पावन समापन।

महा-संग्रह २०२६

लोकप्रिय छठ गीत | Top Charts

पूरा चार्ट देखें (6 गीत) →
कांच ही बांस के बहंगिया
#1

कांच ही बांस के बहंगिया

bhojpuri

स्वरकोकिला शारदा सिन्हा

05:42 14.2M
उगी हे सुरुज देव
#2

उगी हे सुरुज देव

bhojpuri

पवन सिंह

04:55 11.8M
पहिले पहिल हम कईनी
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पहिले पहिल हम कईनी

magahi

मालिनी अवस्थी

06:12 9.5M
छठी माई के बरतिया
#3

छठी माई के बरतिया

bhojpuri

पवन सिंह

05:10 9.2M
मारबो रे सुगवा धनुष से
#4

मारबो रे सुगवा धनुष से

maithili

अनुराधा पौडवाल

05:18 8.1M
छठी मईया रीमिक्स (EDM Devotional)
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छठी मईया रीमिक्स (EDM Devotional)

hindi

डीजे रीमिक्स पूर्वांचल

04:15 5.8M
स्वर साधना एवं लोक परंपरा

प्रसिद्ध छठ गायक | Legendary Singers

कार्ड पर माउस ले जाएं (Hover card) और जानें उनकी अमर कृतियाँ

स्वरकोकिला शारदा सिन्हा

स्वरकोकिला शारदा सिन्हा

पद्म भूषण - बिहार की स्वरकोकिला

"बिहार की सुप्रसिद्ध लोकगायिका जिन्होंने छठ पर्व को अपनी मधुर वाणी से अमर बना दिया।"

48+ लोकगीत 3D Flip

स्वरकोकिला शारदा सिन्हा के प्रमुख गीत

  • कांच ही बांस के बहंगिया
  • होइहि अरग के बेर
  • दुखवा मिटाईं छठी मईया
सर्वोपरि: कांच ही बांस के बहंगिया
अनुराधा पौडवाल

अनुराधा पौडवाल

पद्म श्री - भक्ति संगीत साम्राज्ञी

"अपनी मधुर और सात्विक गायकी से करोड़ों छठ भक्तों के हृदय में बसने वाली महान गायिका।"

32+ लोकगीत 3D Flip

अनुराधा पौडवाल के प्रमुख गीत

  • मारबो रे सुगवा धनुष से
  • उगी सुरुज देव
  • केलवा के पात पर
सर्वोपरि: मारबो रे सुगवा धनुष से
पवन सिंह

पवन सिंह

भोजपुरी संगीत सम्राट

"युवा वर्ग के सबसे पसंदीदा लोकगायक, जिनके छठ गीत हर साल रिकॉर्ड बनाते हैं।"

25+ लोकगीत 3D Flip

पवन सिंह के प्रमुख गीत

  • उगी हे सुरुज देव
  • माई लागतावे जाड़ा
  • छठी माई के बरतिया
सर्वोपरि: उगी हे सुरुज देव
मालिनी अवस्थी

मालिनी अवस्थी

पद्म श्री - शास्त्रीय लोकगायिका

"पूर्वांचल और बिहार की पारम्परिक लोक कला को विश्व पटल पर प्रस्तुत करने वाली विदुषी।"

18+ लोकगीत 3D Flip

मालिनी अवस्थी के प्रमुख गीत

  • पहिले पहिल हम कईनी
  • आवा छठी माई
  • गंगा जी के पावन तीरे
सर्वोपरि: पहिले पहिल हम कईनी
लोक-संस्कृति एवं पावन परंपरा

पावन छठ महापर्व: सूर्य उपासना एवं लोक-आस्था का अमर संगम

छठ पूजा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, सूर्य देव और छठी मईया के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का सबसे अनूठा और पवित्र महा-अनुष्ठान है। यह प्रत्यक्ष देव सूर्य भगवान की उपासना का पर्व है, जो समस्त सृष्टि को ऊर्जा, प्रकाश और जीवन प्रदान करते हैं। चार दिनों तक चलने वाले इस कठिन व्रत में व्रती बिना जल ग्रहण किए कड़े नियमों का पालन करते हैं।

छठ महापर्व की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पूर्ण पर्यावरण-अनुकूलता और सात्विकता है। इसमें प्रयुक्त होने वाली हर सामग्री — कांच के बांस की बहंगी, सुपेली, माटी का दीया, ठेकुआ, गन्ना, और सुथनी — सीधे प्रकृति माँ से प्राप्त होती है। इसमें न तो किसी पुरोहित की आवश्यकता होती है और न ही किसी भव्य मंदिर की; पवित्र नदी का घाट ही ईश्वर का सबसे विशाल द्वार बन जाता है।

यह पर्व सामाजिक समरसता और समानता की अनुपम मिसाल है। गंगा घाटों पर अमीर-गरीब, ऊंच-नीच का भेद समाप्त हो जाता है। सब मिलकर एक ही घाट पर कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होते हैं और अस्त होते तथा उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। यही समरसता छठ पर्व को संपूर्ण भारत वर्ष की लोक-आस्था का अमर प्रतीक बनाती है।

छठ गीतों के बिना यह महापर्व अधूरा है। शारदा सिन्हा, अनुराधा पौडवाल, और पवन सिंह जैसे महान कलाकारों के स्वर में "कांच ही बांस के बहंगिया" और "उगी हे सुरुज देव" जैसे गीत हर घर और हर घाट को भक्तिमय बना देते हैं। हमारा यह मंच इन्हीं पावन लोकगीतों को संजोने और दुनिया भर के छठ भक्तों तक पहुँचाने के लिए समर्पित है।

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पावन व्रत परंपरा एवं विधि

छठ पूजा चार दिवसीय अनुष्ठान

सत्य, अहिंसा, पवित्रता और सूर्य उपासना का सर्वोपरि पर्व

तृतीय दिवस अनुष्ठान

पहला अर्घ्य - संध्या अर्घ्य (Sandhya Arghya)

कार्तिक शुक्ल षष्ठी को अस्ताचलगामी (डूबते हुए) भगवान सूर्यदेव को पहला अर्घ्य दिया जाता है। बांस की बहंगी में ठेकुआ, गन्ना, नारियल, और फल लेकर समूचा परिवार गंगा तट पर एकत्र होता है।

  • अस्ताचलगामी सूर्य को दूध एवं जल से अर्घ्य
  • ठेकुआ एवं मौसमी फलों से सजी सूप और बहंगी
  • घाटों पर जगमगाते मिट्टी के हजारों दिए
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